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दो पौधों से शुरू हुआ सफर, आज 8 बीघा में लहलहा रहा अंजीर का बाग

Writer: FM JHUNJHUNU
FM JHUNJHUNU
Sep 12
4 min read

झुंझुनूं | किसान सफलता की कहानी

झुंझुनूं जिले के गांव बुगाला के किसान और पूर्व सैनिक रामकुमार बुगालिया ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए अंजीर की खेती को अपनी नई पहचान बना लिया है। करीब तीन साल पहले शुरू किया गया उनका यह प्रयोग आज 8 बीघा में फैले अंजीर के बाग के रूप में विकसित हो चुका है।

रामकुमार बुगालिया बताते हैं कि अंजीर की खेती का विचार उन्हें उस समय आया, जब वे सेना में ड्यूटी के दौरान गुजरात और जैसलमेर क्षेत्र में गए थे। वहां उन्होंने अंजीर की खेती को देखा और इसके प्रति उनकी रुचि बढ़ी। उन्होंने खेती शुरू करने से पहले काफी जानकारी जुटाई और अंजीर की खेती की संभावनाओं पर रिसर्च की।


दो पौधों से शुरू हुआ सफर

रामकुमार ने शुरुआत में केवल दो अंजीर के पौधों के साथ प्रयोग किया। पौधों का विकास और परिणाम देखकर उन्हें सफलता का भरोसा मिला। इसके बाद उन्होंने बड़े स्तर पर अंजीर की खेती करने का निर्णय लिया।

आज यही छोटा-सा प्रयोग बढ़कर 8 बीघा के अंजीर फार्म में बदल चुका है।


उनका कहना है कि किसी भी नई फसल को बड़े स्तर पर लगाने से पहले किसान को छोटे स्तर पर उसका प्रयोग जरूर करना चाहिए। इससे स्थानीय मिट्टी, पानी, मौसम और बाजार की स्थिति को समझने में मदद मिलती है।


फरवरी में पौधरोपण को बताया बेहतर समय

किसान रामकुमार बुगालिया के अनुसार, अंजीर की खेती के लिए फरवरी माह में पौधे लगाना बेहतर माना जाता है। उन्होंने बताया कि शुरुआती अवस्था में छोटे पौधों पर फल आने लगते हैं, लेकिन किसान को उन फलों को फसल के रूप में नहीं लेना चाहिए।


उनके अनुसार, जब पौधा छोटा हो और उस पर शुरुआती फल आएं तो उन्हें तोड़ देना चाहिए, ताकि पौधे की ताकत उसके विकास में लगे और आगे चलकर पौधा मजबूत होकर बेहतर उत्पादन दे सके।


ड्रिप सिंचाई से कम पानी में खेती

झुंझुनूं जैसे क्षेत्र में पानी की उपलब्धता खेती के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है। रामकुमार बुगालिया ने अंजीर की खेती में ड्रिप सिंचाई पद्धति को अपनाया है।


ड्रिप सिस्टम के माध्यम से पौधों की जरूरत के अनुसार पानी दिया जाता है। उनका अनुभव है कि अंजीर की खेती में पानी की खपत अपेक्षाकृत कम रहती है और ड्रिप सिंचाई से पानी का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है।


खेती में वे जीवामृत और गोबर की खाद का भी उपयोग करते हैं। उनका प्रयास है कि बाग में प्राकृतिक और जैविक संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए।


पक्षियों से फलों की सुरक्षा के लिए पूरे बाग को जाल से ढका

अंजीर के फल तैयार होने के बाद उन्हें पक्षियों से बचाना भी एक चुनौती है। रामकुमार ने इसका व्यावहारिक समाधान निकाला है। उन्होंने पूरे अंजीर के बाग को जाल से कवर कर रखा है, जिससे पक्षियों से फलों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। यह व्यवस्था उनके फार्म की खास विशेषताओं में शामिल है।


मेहनत कम, लेकिन सही समय पर प्रबंधन जरूरी

रामकुमार के अनुसार अंजीर की खेती में लगातार भारी शारीरिक मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने बताया कि कटिंग के समय अपेक्षाकृत अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जबकि बाकी समय बाग में घास-फूस हटाने और सामान्य देखभाल जैसे काम होते हैं।


उनके अनुसार, यदि किसान समय पर पौधों की कटिंग, सिंचाई और बाग की साफ-सफाई का ध्यान रखे तो अंजीर की खेती को व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है।


इस काम में रामकुमार की पत्नी भी उनका पूरा सहयोग करती हैं। दोनों मिलकर बाग की देखभाल और खेती से जुड़े कार्यों को संभालते हैं।


स्थानीय बाजार में जागरूकता कम, ऑनलाइन बाजार ने खोले नए रास्ते

अंजीर की खेती में उत्पादन के साथ-साथ बाजार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रामकुमार बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर अंजीर की मांग अभी अपेक्षाकृत कम है और लोगों में इस फल को लेकर जागरूकता भी कम है।


लेकिन उन्होंने स्थानीय बाजार तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने ऑनलाइन बिक्री का रास्ता अपनाया और अपने अंजीर फार्म के लिए वेबसाइट भी तैयार की है।


रामकुमार बताते हैं कि राजस्थान से बाहर उनके द्वारा तैयार किए गए अंजीर की मांग काफी अच्छी है। बाहर भेजे गए उत्पाद के संबंध में वे ग्राहकों से लगातार फीडबैक भी लेते हैं।


उनके अनुसार, ग्राहकों ने उनके अंजीर की गुणवत्ता को लेकर बहुत अच्छी प्रतिक्रिया दी है। इससे उन्हें अपने उत्पाद की गुणवत्ता और बाजार की संभावनाओं पर और अधिक विश्वास मिला है।


पूर्व सैनिक से बने किसान उद्यमी

रामकुमार बुगालिया की कहानी केवल एक नई फसल अपनाने की कहानी नहीं है। यह एक ऐसे किसान की कहानी है, जिसने सेना की नौकरी के दौरान देखे गए एक कृषि मॉडल को अपने गांव की जमीन पर आजमाने का फैसला किया।


एक तरफ सैनिक जीवन ने उन्हें अनुशासन और मेहनत सिखाई, तो दूसरी तरफ खेती के प्रति उनके प्रयोग और रिसर्च ने उन्हें एक नई दिशा दी। दो पौधों से शुरू हुआ प्रयोग आज 8 बीघा के फार्म तक पहुंच चुका है।


उनका फार्म यह संदेश देता है कि यदि किसान नई तकनीक, नई फसल और नए बाजार के साथ प्रयोग करने को तैयार हो, तो पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी और वैकल्पिक फसलों से भी आय के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।


किसानों के लिए रामकुमार का संदेश

रामकुमार बुगालिया अंजीर की खेती को अच्छे मुनाफे की संभावनाओं वाली खेती मानते हैं। हालांकि उनका कहना है कि किसी भी किसान को बिना जानकारी और बाजार का आकलन किए सीधे बड़े स्तर पर निवेश नहीं करना चाहिए।


वे किसान साथियों से कहते हैं कि नई फसलों के बारे में जानकारी लें, छोटे स्तर पर प्रयोग करें, खेती की तकनीक को समझें और बाजार की संभावनाओं को देखते हुए आगे बढ़ें।


उनका संदेश है—

“अगर किसान नई खेती के बारे में सोचने और उसे सही तरीके से अपनाने का साहस करे, तो खेती में सफलता के नए रास्ते खुल सकते हैं।”


किसान से संपर्क

किसान: रामकुमार बुगालिया

गांव: बुगाला

तहसील: झुंझुनूं

जिला: झुंझुनूं, राजस्थान

मोबाइल: 8967422540

वेबसाइट: www.bugaliaanjeerfarm.in


यह कहानी FM Jhunjhunu 90.0 द्वारा स्थानीय किसानों के नवाचार, सफल प्रयोगों और कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं को सामने लाने के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

 
 
 

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